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भागवत कथा के दौरान रुकमणी विवाह पर उमड़ी भारी भीड़

भागवत कथा के दौरान रुकमणी विवाह पर उमड़ी भारी भीड़

भागवत के दौरान रुक्मणि के विवाह मै उमड़ी भीड़                 मंडल प्रभारी खलील अहमद की रिपोर्ट         
अलीगढ़। भगवान भक्त के अधीन है। गोपियां मां कात्यानी की पूजा करती हुई माता से प्रार्थना करती है कि हे मां मुझे नन्द किशोर को पति के रूप में दीजिए। प्रार्थना तो अच्छी है, लेकिन गोपियां धर्म की मर्यादा का उलंघन कर रही हैं, क्योंकि जल में नग्न स्नान नही करना चाहिए। बसंत ऋतु के अवसर पर शिव मंदिर मोहनलाल गंज के प्रांगण में चल रही श्रीमद भागवत कथा के छटे दिन मंगलवार को भगवान श्री कृष्ण ककी रासलीलाओं का वर्णन करते हुए कथा व्यास पूज्य गुरुदेव महामंडलेश्वर स्वामी हरिकांत हरिहरा नन्द महाराज ने कहा कि भक्त की मर्यादा को रखने के लिए औरधर्म के विरुद्ध आचरण न होइस लिए भगवान नारायण गोपियों के वस्त्रों का हरण कर लेते हैं। वह अपने भक्तो को सांत्वना देते हुएउनके भाव को समझ कर महारास करते हैं।
हरिकांत जी ने आगे बताया किमहारास से गोपियों को ऐसा आभास होता हैकि भगवान उनके साथ नृत्य चुम्बन  और स्पर्श का एहसास कराते हैं। यह उनका मोह है।
रूक्मणी विवाह का प्रसंग सुनाते हुए महामंडलेश्वर कहते हैं किजब भक्त भगवान को सर्वस्य न्योछावर कर देता है तो भगवान सामाजिक बिडंबना को त्याग कर अपने भक्तो पर अनुग्रह करने के लिए गांधर्व नीति से विवाह कर लेते हैं। कथा में रुक्मणि विवाह धूमधाम से मनाया गया। प्रात कालीन बेला में आचार्य गौरव हर्ष  बेदिक ने यजमान अजय यादव, सोनी यादब, रामजी, सुरेश, रमेश, उमेश, महेश, दिनेश, लवकुश,पवन कुमार वार्ष्णेय,मुकेश पराशर, सत्य प्रकाश शर्मा, दिव्य वार्ष्णेय आदि से हवन में आहुतियां दिलवाई।

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