
HAPUR NEWS - दबंगो ने छपकौली शिवनगरी पर कब्जे का किया प्रयास
दबंगो ने छपकौली शिवनगरी पर कब्जे का किया प्रयास
दबंगो ने धोखे से सदर विधायक को मौके ओर बुलाया सही स्थिति जान शंकराचार्य की आरती में विधायक ने लिया भाग
हापुड़ न्यूज़ संवाददाता
हापुड़ । श्यामेश्वर महादेव मन्दिर छपकौली मैं वर्ष 1980 में पहुंचे भानपुरा मध्यप्रदेश के पीठाधीश्वर स्वामी दिव्यानन्द तीर्थ जी महाराज ने अपने धर्म की तपोस्थली इस स्थान को बनाया और लगातार पूजा अर्चना करते हुए इस तीर्थ स्थान को जीर्णोद्धार भवन देते हुए जनपद ही नहीं देश व प्रदेश में आस्था का केंद्र बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और अंततः वर्ष 2019 की अप्रैल माह में अपने अधूरे मंदिर के पूर्ण जीर्णोद्धार के सपनों को छोड़कर देवलोक गमन कर लिया।
जिसके बाद कुछ ग्रामीणों द्वारा मंदिर को अपने आय का साधन मानते हुए मंदिर पर पूजा अर्चना शुरू कर दी और अपने उत्तराधिकारी के रूप में शंकराचार्य गद्दी सौंप कर गए नव नियुक्त भानपुरा पीठाधीश्वर स्वामी ज्ञानानंद तीर्थ जी महाराज को इस तीर्थ स्थल से भगाने की रणनीति बनानी शुरू कर दी। इसी रणनीति के तहत आज गुरु पर्व के अवसर पर इन्ही दबंगों द्वारा भानपुरा पीठ के पीठाधीश्वर एवं छपकौली शिव नगरी के शंकराचार्य के देवलोकगमन के बाद बनाए गए उनके मंदिर पर हो रहे गीता पाठ को भी रोकने का भरपूर प्रयास करते हुए उनके शिष्य को भी भगाने का प्रयास किया। जिसकी सूचना पर गांव की हालांकि काफी लोग मौके पर पहुंच गए इस दौरान दबंगों द्वारा गलत निर्मित सूचना देते हुए हापुड़ नगर के सदर विधायक को भी मौके पर बुला लिया गया।
परंतु जब उन्होंने मौके की सच्चाई को जाना व परखा तो उन्होंने शंकराचार्य दिव्यानन्द तीर्थ जी महाराज की प्रतिमा पर आरती करते हुए धर्म के प्रति अपनी आस्था व्यक्त की।
अब देखने वाली बात यह है कि क्या धर्म की नगरी पर भी शंकराचार्य या पीठाधीश्वर सनातन धर्म की पताका फहराने के लिए संरक्षक की भूमिका से दबंगो द्वारा प्रदेश के मुखिया पीठाधीश्वर योगी आदित्यनाथ के होने के बावजूद भी भगा दिए जायेगे या पृथक कर दिए जाएंगे यह एक बड़ा ही विचित्र सवाल आज धर्म को लेकर एक धर्म नगरी में देखने को मिला।
मंदिर पर मौजूद ग्रामीणों द्वारा बताया गया कि आज मदन सिंह पुत्र नानक सिंह, शिवकुमार ढिल्लों पुत्र सुतेश सिंह, सतीश मसंद पुत्र अमरपाल मसंद करीब एक दर्जन अपने साथियों के साथ आए तथा भानपुरा पीठ के पीठाधीश्वर स्वामी दिव्यानन्द तीर्थ जी महाराज की समाधि स्थल पर चल रहे कार्यक्रम को रोके जाने का प्रयास करते हुए अभद्रता करने लगे जिसकी सूचना गांव में पहुंचते ही स्वामी जी के भक्त वहां पहुंच गए जिनकी इन दबंगों से काफी नोकझोंक भी हुई परंतु ग्रामीणों की भारी भीड़ को देखकर दबंग वहां से खिसक लिये और स्वामी जी की आरती पूजा में भी शामिल नही हुये।
गांव के पूर्व प्रधान अजयपाल सिंह का कहना है कि स्वामी जी द्वारा इस मंदिर का जीर्णोद्धार कराया गया था तथा उन्हीं किताब के चलते मंदिर देश विदेशों तक आज विख्यात है दबंग किस्म के लोग मंदिर में पूजा अर्चना कर मंदिर से ही अपने परिवारों का लालन पालन करते हुए पूरी तरह मंदिर को कब्जा करने पर तुले हैं गांव के काफी लोग जो अनेक जातियों से जुड़े हैं मंदिर को पूरी तरह कब्जा कर धर्म स्थल के स्थान पर अपनी कमाई का स्थल बना देना चाहते हैं इन लोगों द्वारा मंदिर के नाम से क्षेत्र में रसीद काटकर धन उगाही भी की जा रही है परंतु उसका ब्यौरा या हिसाब किताब भी किसी के पास नहीं है। जो भी रसीद काटकर धन प्राप्त कर लेता है यह धन उसी का हो जाता है जिस कारण गांव के पंडित ही नहीं अन्य बिरादरी के लोग भी इस मंदिर पर अपना कब्जा जमाने की फिराक में है।
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